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तुरंत कार्रवाई करें। पहले 30 मिनट में गति सबसे ज़्यादा मायने रखती है।

नीचे दिए गए चरणों का क्रम से पालन करें। अभी इस वेबसाइट पर कुछ और पढ़ने के लिए न रुकें।

1. अपने बैंक की फ्रॉड हेल्पलाइन को तुरंत कॉल करें

अपने अकाउंट/UPI ID को अभी फ्रीज़ या ब्लॉक करने के लिए कहें। हर प्रमुख बैंक की 24x7 फ्रॉड लाइन होती है — अगर आपके पास नंबर सेव नहीं है तो पूरी नंबर लिस्ट यहां देखें

2. राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन को कॉल करें: 1930

यह एक मुफ़्त, सरकार द्वारा संचालित हेल्पलाइन है जो खासतौर पर वित्तीय धोखाधड़ी की तेज़ी से रिपोर्टिंग के लिए बनाई गई है। जितनी जल्दी आप कॉल करेंगे, आपके बैंक द्वारा ट्रांसफर को रोकने या वापस लाने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी।

3. cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाएं और "Report Financial Fraud" के तहत शिकायत दर्ज करें। अपना acknowledgment number सुरक्षित रखें — बैंक के साथ आगे की कार्रवाई के लिए इसकी ज़रूरत पड़ेगी।

4. गायब होने से पहले सब कुछ का स्क्रीनशॉट लें

मैसेज, कॉल लॉग, UPI ट्रांज़ैक्शन ID, वह ऐप जिसे इंस्टॉल करने के लिए कहा गया था। धोखेबाज़ अक्सर बातचीत का अपना हिस्सा डिलीट कर देते हैं — पहले सबूत सुरक्षित करें।

5. ये काम बिल्कुल न करें

अपना पैसा "वापस लाने" या "अनलॉक" करने का वादा करने वाले किसी को भी और पैसे ट्रांसफर न करें — यह हमेशा एक दूसरी ठगी होती है। स्कैम मैसेज डिलीट न करें। जब तक आपने स्क्रीनशॉट न ले लिया हो, तब तक कोई भी स्क्रीन-शेयरिंग ऐप अनइंस्टॉल न करें।

ऊपर बताए गए कदम उठाने के बाद

आप पढ़ सकते हैं कि रिकवरी और चार्जबैक आमतौर पर कैसे काम करते हैं, या भविष्य में परिवार के किसी और सदस्य के काम आने के लिए पूरी हेल्पलाइन डायरेक्टरी को बुकमार्क कर लें।